गली में आज चाँद निकला - पुष्पा पटेल
तुम आए जो
आया मुझे याद, गली में आज चाँद निकला
अगर आप भी अपनी रचनाओं को हम तक पहुँचाना चाहते है तो अपना नाम, संक्षिप्त स्व-जीवनी तथा अपनी कृतियाँ हमें नीचे दिए हुए संचार पते पर भेजे|
जाने कितने
दिनों के बाद, गली में आज चाँद निकला
ये नैना
बिन काजल तरसे, बारह महीने बादल बरसे
सुनी रब
ने मेरी फ़रियाद, गली में आज चाँद निकला
आज की रात
जो मैं सो जाती, खुलती आँख सुबह हो जाती
मैं तो हो
जाती बस बर्बाद, गली में आज चाँद निकला
मैं ने तुमको
आते देखा, अपनी जान को जाते देखा
जाने फिर
क्या हुआ नहीं याद, गली में आज चाँद निकला
अगर आप भी अपनी रचनाओं को हम तक पहुँचाना चाहते है तो अपना नाम, संक्षिप्त स्व-जीवनी तथा अपनी कृतियाँ हमें नीचे दिए हुए संचार पते पर भेजे|
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